पूर्णिया : ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों पर भी दिखाई देने लगा है। बिहार के पूर्णिया जिले के करीब 10 लोग दुबई में फंसे हुए हैं। इनमें के.नगर थाना क्षेत्र के वनभाग गांव के कई युवक शामिल हैं। स्थानीय परिवारों का कहना है कि बमबारी की खबरों के बाद वहां कामकाज बंद है और कंपनी ने सुरक्षा कारणों से मजदूरों को कमरों में ही रहने के निर्देश दिए हैं।
इन्हीं में से एक 26 वर्षीय महजूद आलम ने अपने पिता से फोन पर कहा, “बाबा, मैं घर आना चाहता हूं। जहां हम रहते थे वहां बमबारी हुई है। कंपनी ने हमें एक कमरे में सुरक्षित रखा है और बाहर निकलने की अनुमति नहीं है।”
छह महीने पहले दुबई गए थे महजूद
वनभाग गांव के वार्ड 5 निवासी महजूद आलम करीब छह महीने पहले रोजगार की तलाश में दुबई गए थे। वहां एक निजी कंपनी में पैकेजिंग का काम करते थे। परिवार के मुताबिक वे पिछले पांच महीनों से हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपये घर भेज रहे थे, जिससे घर की आर्थिक स्थिति संभलने लगी थी।
महजूद के पिता मो. मुद्दिन आलम बताते हैं कि उनके परिवार में कुल सात सदस्य हैं—तीन बेटियां और दो बेटे। दो बेटियों की शादी के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया था। इसी वजह से बेहतर कमाई की उम्मीद में बेटे को एजेंट के माध्यम से दुबई भेजा गया था।
बमबारी के बाद बदले हालात
परिवार के अनुसार हाल ही में दुबई के आसपास हमले और तनाव की खबरों के बाद कंपनी ने कर्मचारियों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। फिलहाल सभी लोग एक कमरे में रह रहे हैं और बाहर निकलने पर रोक है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हालात सामान्य नहीं हैं, जिससे वहां मौजूद भारतीय कामगारों में चिंता बढ़ गई है।
वीडियो कॉल पर पिता से बातचीत के दौरान महजूद भावुक हो गए और जल्द घर लौटने की इच्छा जताई। परिवार के सदस्य उनकी सुरक्षा के लिए दुआ कर रहे हैं।
गांव में चिंता का माहौल
महजूद की पत्नी मीना खातून कहती हैं कि जब से बेटे ने बमबारी की जानकारी दी है, तब से परिवार काफी चिंतित है। रिश्तेदार और पड़ोसी भी लगातार हालचाल पूछ रहे हैं। परिवार के लोग उसके सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहे हैं।
अन्य लोग भी फंसे
महजूद के अलावा वनभाग क्षेत्र के ही मो. अंजार, मो. अफताब, मो. महताब, मो. फैजान और मो. असफर आलम भी दुबई में फंसे बताए जा रहे हैं। ये सभी वहां अलग-अलग कंपनियों में क्रेन चलाने और अन्य तकनीकी काम करते हैं। आम तौर पर उन्हें करीब 50 हजार रुपये तक मासिक आय होती है, लेकिन हालिया हालात के बाद कामकाज ठप है।
पासपोर्ट खोने पर युवक गिरफ्तार
इसी बीच पूर्णिया के चंपानगर क्षेत्र के सौराहा गांव के रहने वाले 26 वर्षीय मिथुन पासवान भी दुबई में मुश्किल में हैं। वे करीब 17 महीने पहले रोजगार के लिए वहां गए थे। करीब छह महीने पहले उनका पासपोर्ट और पहचान पत्र खो गया, जिसके बाद दुबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
मिथुन के पिता कुमुद पासवान और मां बुलबुल देवी बेटे की वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। परिवार ने स्थानीय प्रशासन से लेकर पुलिस अधिकारियों तक मदद की गुहार लगाई है।
एजेंट पर लापरवाही का आरोप
मिथुन के पिता का आरोप है कि जिस एजेंट ने बेटे को विदेश भेजा, उसकी लापरवाही के कारण आज यह स्थिति बनी है। हालांकि एजेंट राजेश कुमार इन आरोपों से इनकार करते हुए कहते हैं कि दस्तावेज खोने या गलत इस्तेमाल की वजह से गिरफ्तारी हुई और वह कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से युवक को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
गांव में परिवार के लोग अब केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।