बिहार में जमीन खरीदना आने वाले समय में महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार की ओर से भूमि निबंधन और संरचना मूल्यांकन दरों (एमवीआर) में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव विभागीय स्वीकृति की प्रक्रिया में है और मंजूरी मिलते ही 1 अप्रैल से नई दरें लागू किए जाने की संभावना है।
पूर्णिया के जिला अवर निबंधक डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, लंबे समय से एमवीआर दरों का पुनरीक्षण नहीं हो सका है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2013 और शहरी क्षेत्रों में 2016 के बाद से दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ। एक दशक से अधिक समय तक संशोधन न होने के कारण राजस्व वसूली और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में व्यावहारिक दिक्कतें सामने आने लगी थीं।
इन्हीं कारणों को देखते हुए विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत पूर्णिया जिले में न्यूनतम मूल्यांकन पंजी (एमवीआर) की दरों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत जमीन के साथ-साथ संरचना (निर्माण) की दरों को भी बाजार मूल्य के अनुरूप लाने पर काम किया गया है।
बाजार से काफी कम हैं मौजूदा सरकारी दरें
वर्तमान में जिले में लागू संरचना दरें बाजार भाव की तुलना में काफी कम हैं। उदाहरण के तौर पर, व्यावसायिक उपयोग वाली डीलक्स संरचना की सरकारी दर करीब 1492 रुपये प्रति वर्ग फीट है, जबकि वास्तविक बाजार मूल्य 5 से 6 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट तक बताया जा रहा है।
इसी तरह, आवासीय संरचनाओं की सरकारी दर औसतन 800 से 1000 रुपये प्रति वर्ग फीट है, जबकि बाजार में यही कीमत 3000 से 5000 रुपये प्रति वर्ग फीट के आसपास है।
इसी अंतर को पाटने के लिए भूमि और निर्माण लागत की सरकारी दरों को तीन से चार गुना तक बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई है। इससे न केवल सरकारी राजस्व में इजाफा होगा, बल्कि नगर निकायों और स्थानीय निकायों को विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे।
2768 राजस्व ग्रामों में बदले जाएंगे सर्किल रेट
नगरीय, उपनगरीय, आयोजन क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर जिले के 2768 राजस्व ग्रामों के सर्किल रेट (एमवीआर) में संशोधन की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिला अवर निबंधन कार्यालय की टीम और जांच कर्मियों ने स्थल निरीक्षण और मूल्य सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव में भूमि निबंधन दरों और संरचना दरों को तीन से चार गुना तक बढ़ाने की अनुशंसा की गई है। अब अंतिम निर्णय विभागीय मंजूरी के बाद लिया जाएगा।










