ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो से बाहर कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस वीडियो के वायरल होने के बाद की गई, जिसमें यूनिवर्सिटी ने एक चीनी कंपनी के रोबोटिक डॉग और एक कोरियन ड्रोन को अपना प्रोजेक्ट बताया था।
आयोजकों ने पहले यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली आपूर्ति बंद की और बाद में स्टॉल पर ताला लगाकर बैरिकेडिंग कर दी।
वीडियो वायरल होने के बाद उठा विवाद
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह एक रोबोटिक डॉग को ‘ओरियन’ नाम से पेश करते हुए कहती दिखीं कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने विकसित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान AI क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।
वीडियो के प्रसार के बाद कई तकनीकी विशेषज्ञों और यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट दरअसल चीन की कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘Go2’ मॉडल है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 2 से 3 लाख रुपये बताई जाती है।
इसी तरह एक अन्य वीडियो में जिस ड्रोन को यूनिवर्सिटी द्वारा कैंपस में ‘शुरुआत से तैयार’ बताया गया, उसे यूजर्स ने करीब 40 हजार रुपये के रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल के रूप में पहचाना।
यूनिवर्सिटी का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि उनका उद्देश्य कैंपस में उन्नत तकनीक लाकर छात्रों को सीखने का अवसर देना है। बयान में स्पष्ट किया गया कि रोबोटिक डॉग यूनिट्री से लिया गया है और इसे यूनिवर्सिटी द्वारा निर्मित होने का दावा नहीं किया गया।
संस्थान ने कहा कि यह उपकरण छात्रों के लिए प्रयोग और अनुसंधान का माध्यम है। साथ ही यह भी दोहराया कि भविष्य में भारतीय छात्रों द्वारा ऐसी तकनीक के स्वदेशी विकास की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रोफेसर नेहा सिंह की प्रतिक्रिया
प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि विवाद संवाद की स्पष्टता न होने के कारण उत्पन्न हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि उत्साह में बातें पूरी तरह साफ नहीं रखी जा सकीं और इसकी जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं ली।
‘एक्स’ पर कम्युनिटी नोट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण वाले पोस्ट पर कम्युनिटी नोट जोड़ दिया। इसमें कहा गया कि संस्थान का यह दावा कि उसने उपकरणों को अपना नहीं बताया, भ्रामक है। कम्युनिटी नोट फीचर के तहत यूजर्स तथ्यात्मक संदर्भ जोड़कर पोस्ट का फैक्ट-चेक करते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित हुई है। पार्टी का आरोप है कि AI समिट में विदेशी उपकरणों को भारतीय नवाचार के रूप में पेश किया गया।
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का प्रभावी उपयोग करने के बजाय यह आयोजन अव्यवस्थित जनसंपर्क कार्यक्रम बनकर रह गया।
नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग?
यूनिट्री Go2 चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा निर्मित एआई-संचालित रोबोटिक डॉग है। यह 4D LiDAR तकनीक से लैस है, जो इसे बाधाओं की पहचान करने, सीढ़ियां चढ़ने और असमान सतहों पर चलने में सक्षम बनाती है।
करीब 2 से 3 लाख रुपये कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड पर काम करता है और शिक्षा व अनुसंधान क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है।
यूनिट्री कंपनी के बारे में
यूनिट्री एक चीनी रोबोटिक्स कंपनी है, जो रोबोटिक डॉग और ह्यूमनॉइड रोबोट के निर्माण के लिए जानी जाती है। कंपनी किफायती और उन्नत सेंसर आधारित तकनीक विकसित करती है, जिसका उपयोग शोध, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में होता है।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की पृष्ठभूमि
2011 में स्थापित गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में स्थित है। संस्थान 20 स्कूलों के माध्यम से डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक 200 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित करता है। सुनील गलगोटिया इसके चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं।
